नीयत
(लघु कथा)
साहिल चाचा ठठा कर जोर से हँसे और बोले, "ये कैसी बात कर दी तूने पगले! तुम्हारे पिताजी से जो एक लाख उधार लिया था ,वह तो चुकाना ही था। तुम्हारे पिताजी को वापस किया, उन्होंने वापस नहीं लिया तो उनके नाम से व्यापार में लगा दिया। आज जो 'रौशन इंडस्ट्रीज' देख रहे हो, वह तुम्हारे पिताजी यानी रौशन कुमार की ही है। दस लाख से अब रोहिणी बिटिया की शादी धूमधाम से करना। मित्र नहीं है तो क्या हुआ, वह हमारी भी तो बेटी है।" अब मोहित की आंखों में आँसू और दिल में सुकून था। पिताजी की जीवन भर की ईमानदारी और उदारता आज ब्याज सहित उनके घर वापस जो लौट के आ रही थी।

